नवरात्रि का प्रथम दिवस-माँ शैलपुत्री

कविता — ज्योति बरनवाल

दिनांक-११-१०-२०२६
🌺 आनंद का उत्सव 🌺

नवरात्रि का प्रथम दिवस — माँ शैलपुत्री

नवरात्रि का उत्सव देखो, आज धरा पर आया,
माँ शैलपुत्री का प्रथम दिवस, नगाड़ों ने हर्ष जगाया।
जग में खुशियाँ छाईं अपार,
आओ मिटाएँ बुराइयाँ हज़ार।

करें स्वागत माँ दुर्गा का, सजाकर पूजा की थाली,
पूजा-विधि का ज्ञान नहीं, पर श्रद्धा है निराली।
जितना दिया है तुमने माँ, वही करूँ अर्पण आज,
तेरे चरणों में शीश झुकाकर, रख लूँ तेरा मान।

पर्वतराज की बेटी न्यारी, महिमा सबसे प्यारी,
वृषभ सवारी, हाथ त्रिशूल, छवि लगती सुखकारी।
घी का भोग लगाऊँ माँ, स्वीकारो मेरी भक्ति,
सबके हृदय में करुणा भरना, देना प्रेम की शक्ति।

वाणी में करुणा भरना, कर्मों में सत्य जगाना,
मेरी लेखनी में ज्योत जलाकर, माँ अपना आशीष बरसाना।
ज्योति करे अरदास, माँ, सुखी रहे संसार,
तेरी कृपा बनी रहे, माँ, जीवन में हर बार।

कवयित्री ज्योति बरनवाल,
नवादा (बिहार)

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