"सरस्वती वंदना"
कविता — उर्मिला ढौंडियाल ‘उर्मि’
हे मां सरस्वती, मां शारदे वरदान दे।
हे मां सरस्वती, मां शारदे यह वरदान दे।
तम से घिरा है मेरा मन, इस ज्ञान का प्रकाश दे।
वाणी में हो अशुद्धता जहां, वहां शुद्धता के विचार दे।
हे मां सरस्वती मां शारदे वरदान दे
हे मां सरस्वती मां शारदे वरदान दे
हुआ भाव शून्य ये जहां, मां भावों से... संवार दे।
संगीतमय हो ये जहां, वीणा की तुम झंकार दो।
हे मां सरस्वती.......
हर शब्द संवरे अर्थ निखरे मां हर पंक्ति में वह सार दो। वीणावादिनी करुणामई मां ,सुख मय तेरा आशीष हो।
हे मां सरस्वती, मां शारदे यह वरदान दे।
तम से घिरा है मेरा मन, इस ज्ञान का प्रकाश दे।
वाणी में हो अशुद्धता जहां, वहां शुद्धता के विचार दे।
हे मां सरस्वती मां शारदे वरदान दे
हे मां सरस्वती मां शारदे वरदान दे
हुआ भाव शून्य ये जहां, मां भावों से... संवार दे।
संगीतमय हो ये जहां, वीणा की तुम झंकार दो।
हे मां सरस्वती.......
हर शब्द संवरे अर्थ निखरे मां हर पंक्ति में वह सार दो। वीणावादिनी करुणामई मां ,सुख मय तेरा आशीष हो।