किसने किया श्रृंगार मैया जी का
कविता — ज्योति बरनवाल
🌺 किसने किया श्रृंगार मैया का 🌺
मेरी माँ ने किया श्रृंगार मैया जी का,
मैंने देखा है माँ को सजाते मैया को।
आँखों से आँखों की बातें होती हैं,
माँ की आँखें प्रेमाश्रुओं से भर जाती हैं।
सिंदूर-कुमकुम का तिलक लगाया,
मैया के ललाट पर सुंदर बिंदी सजाया।
मैया की आँखों में काजल लगाया,
मेरी माँ ने अद्भुत श्रृंगार सजाया।
मैया के हाथों में मेहँदी रचाई,
चरणों में महावर की लाली सजाई।
नाक में नथ, माथे पर माँगटीका सजाया,
गले में गेंदे की माला पहनाया।
कानों में सुंदर कर्णफूल सजाए,
ताज़े फूलों से मैया को महकाए।
रुई पर इत्र लगाकर अर्पित किया,
फूलों से मैया का दरबार सजा दिया।
फल, मेवे और खीर का भोग लगाया,
धूप-दीप जलाकर जयकारा लगाया।
मेरी माँ ने किया श्रृंगार मैया जी का,
मैंने अपनी आँखों से देखा प्यार मैया जी का।
कवयित्री ज्योति बरनवाल, नवादा (बिहार )
मेरी माँ ने किया श्रृंगार मैया जी का,
मैंने देखा है माँ को सजाते मैया को।
आँखों से आँखों की बातें होती हैं,
माँ की आँखें प्रेमाश्रुओं से भर जाती हैं।
सिंदूर-कुमकुम का तिलक लगाया,
मैया के ललाट पर सुंदर बिंदी सजाया।
मैया की आँखों में काजल लगाया,
मेरी माँ ने अद्भुत श्रृंगार सजाया।
मैया के हाथों में मेहँदी रचाई,
चरणों में महावर की लाली सजाई।
नाक में नथ, माथे पर माँगटीका सजाया,
गले में गेंदे की माला पहनाया।
कानों में सुंदर कर्णफूल सजाए,
ताज़े फूलों से मैया को महकाए।
रुई पर इत्र लगाकर अर्पित किया,
फूलों से मैया का दरबार सजा दिया।
फल, मेवे और खीर का भोग लगाया,
धूप-दीप जलाकर जयकारा लगाया।
मेरी माँ ने किया श्रृंगार मैया जी का,
मैंने अपनी आँखों से देखा प्यार मैया जी का।
कवयित्री ज्योति बरनवाल, नवादा (बिहार )