हे शारदे मां
कविता — प्रिया काम्बोज प्रिया
हे शारदे मां हे शारदे मां
ज्ञान का भर दो भंडार हे मां
हे शारदे मां हे शारदे मां,,,,,,,
श्वेत कमल पर विराजो हे मां
वस्त्र श्वेत तुम धारणी हे मां
हाथों में वीणा रुप सरस्वती बनाया
कंठ में विराज सुरों का दो दान मां
हे शारदे मां हे शारदे मां,,,,,,,,
ज्ञान की देवी अज्ञानता मिटाती
कुबुद्धि से सत्बुद्धि तुम ही बनाती
जीवन उज्ज्वल भविष्य हो तब ही
आशीष का हाथ जब रखती हो मां
हे शारदे मां हे शारदे मां,,,,,,,,,
प्रिया काम्बोज प्रिया ✍🏻 स्वरचित रचना
ज्ञान का भर दो भंडार हे मां
हे शारदे मां हे शारदे मां,,,,,,,
श्वेत कमल पर विराजो हे मां
वस्त्र श्वेत तुम धारणी हे मां
हाथों में वीणा रुप सरस्वती बनाया
कंठ में विराज सुरों का दो दान मां
हे शारदे मां हे शारदे मां,,,,,,,,
ज्ञान की देवी अज्ञानता मिटाती
कुबुद्धि से सत्बुद्धि तुम ही बनाती
जीवन उज्ज्वल भविष्य हो तब ही
आशीष का हाथ जब रखती हो मां
हे शारदे मां हे शारदे मां,,,,,,,,,
प्रिया काम्बोज प्रिया ✍🏻 स्वरचित रचना