पहली कविता
कविता — प्रिया काम्बोज प्रिया
पुरानी बातों से तुम्हें एक बात बताते हैं
सबको पहली कविता का किस्सा सुनाते हैं
चढ़ा नया नया कविता लिखने का खुमार
हुआ एक हादसा जो आज वो बताते हैं
एक दिन सहेली की भाई ने प्रेम-पत्र हमसे लिखवाया
कविता रूप में हमने हाल ए दिल फिर उसका बताया
दे पत्र उसके हाथ बोली "जाओ मनसा तुम्हारी पूरी होगी
सीखा मोहब्बत के दांव-पेंच फिर अच्छे से उसे समझाया
ना जानते थे कि अब आगे क्या होगा
कैसे उसका हाल ए दिल बयां फिर होगा
दिन बीता रात गुजरी नयी सुबह फिर आयी
हाथ में गुलाब खत ले फिर मेरे ही घर वो आया होगा
खड़ी रह गई सदमे में ये क्या हो गया
लिखा था खत दूजे के लिए वो मेरे लिए हो गया
किस्मत पर अपनी रोना बहुत ही आया हमें
हम तो मानें भईया तुम्हें वो तो सईया हो गया
अब क्या कहें कि क्या से क्या हो गया
बता सकी को अपनी हंस हंस हाल बुरा हो गया
जो सोच रहा था बनना सईया खुद को हमारा
बन भईया फिर वो से सुर ताल हो गया
चढ़ा कविता लिखने का जो नशा चढ़ा कविता लिखने का जो नशा
वो नशा अब ढीला हो गया
कमस खाई ना लिखेंगे किसी ओर के लिए कविता
हाल ए दिल अपना लिख डायरी में फिर किया बयां
प्रिया काम्बोज प्रिया ✍️ स्वरचित
सहारनपुर उत्तर प्रदेश
19/11/22
सबको पहली कविता का किस्सा सुनाते हैं
चढ़ा नया नया कविता लिखने का खुमार
हुआ एक हादसा जो आज वो बताते हैं
एक दिन सहेली की भाई ने प्रेम-पत्र हमसे लिखवाया
कविता रूप में हमने हाल ए दिल फिर उसका बताया
दे पत्र उसके हाथ बोली "जाओ मनसा तुम्हारी पूरी होगी
सीखा मोहब्बत के दांव-पेंच फिर अच्छे से उसे समझाया
ना जानते थे कि अब आगे क्या होगा
कैसे उसका हाल ए दिल बयां फिर होगा
दिन बीता रात गुजरी नयी सुबह फिर आयी
हाथ में गुलाब खत ले फिर मेरे ही घर वो आया होगा
खड़ी रह गई सदमे में ये क्या हो गया
लिखा था खत दूजे के लिए वो मेरे लिए हो गया
किस्मत पर अपनी रोना बहुत ही आया हमें
हम तो मानें भईया तुम्हें वो तो सईया हो गया
अब क्या कहें कि क्या से क्या हो गया
बता सकी को अपनी हंस हंस हाल बुरा हो गया
जो सोच रहा था बनना सईया खुद को हमारा
बन भईया फिर वो से सुर ताल हो गया
चढ़ा कविता लिखने का जो नशा चढ़ा कविता लिखने का जो नशा
वो नशा अब ढीला हो गया
कमस खाई ना लिखेंगे किसी ओर के लिए कविता
हाल ए दिल अपना लिख डायरी में फिर किया बयां
प्रिया काम्बोज प्रिया ✍️ स्वरचित
सहारनपुर उत्तर प्रदेश
19/11/22