मैं हो गया तेरा

कविता — राघव सचिन

मैं हो गया तेरा..,
जबसे मैंने तुझे देखा

जिसमें तबाही थी लिखी,
मिट गई वो रेखा।

जो तू आया, तो उड़ आया
खुशियों का पंछी मेरा।

जो तुम जाएगा, उड़ जाएगा
खुशियों का पंछी मेरा।

जो तुम आया , बरस आया
सुकून का बादल मेरा।

जो तू जाएगा ,बरस जाएगा
नैनो का बादल मेरा।

था अंधेरा यहां हर जगह,
चांद भी मुझसे रूठा था।

तुझसे रोशन हुई ज़िंदगी,
चांद झूठा था।

तू ही महताब मेरा।
तू ही रोशन सितारा।

तेरे जाने से बह जाएगा,
नैनो का दरिया मेरा।

जो तू आया, तो खिल आया
फूल ज़िंदगी का मेरा।

जो तू जाएगा, झड़ जाएगा
फूल ज़िंदगी का मेरा।

जो तू आया, तो उड़ आया
खुशियों का पंछी मेरा।

जो तू जाएगा,उड़ जाएगा
खुशियों का पंछी मेरा।

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