तेरी मेरी दोस्ती
कविता — राघव सचिन
तेरी मेरी दोस्ती ,
यूं ही अमर रहे।
खुशियों भरी दोस्ती की,
अपनी डगर रहे।
मेरे दुःख और सुख में,
कोई साथी न हो,
तेरा हाथ मेरे,
हाथों में मगर रहे।
नामुमकिन भी मुमकिन,
हो ही जाएगा।
दुःख से भरा समंदर,
एक दिन खो ही जाएगा।
ऐ मेरे सखा.....
तू रहे साथ हरपल।
तब तो सच में...
मेरा हर दुख को ही जाएगा।
यूं ही अमर रहे।
खुशियों भरी दोस्ती की,
अपनी डगर रहे।
मेरे दुःख और सुख में,
कोई साथी न हो,
तेरा हाथ मेरे,
हाथों में मगर रहे।
नामुमकिन भी मुमकिन,
हो ही जाएगा।
दुःख से भरा समंदर,
एक दिन खो ही जाएगा।
ऐ मेरे सखा.....
तू रहे साथ हरपल।
तब तो सच में...
मेरा हर दुख को ही जाएगा।