तुम्हारा साथ ज़रूरी है

कविता — राघव सचिन

तुम्हारा साथ जरूरी है ।
सहन होती ना दूरी है।

कोई साथी नहीं मेरा
मेरी दुनिया तू पूरी है।

तुझे जो देख लूं पलभर।
सफल हो जाता है सफर।

तुझे ही देखने में सुन
बीत जाए मेरी उमर।

तू मेरे साथ में रहे।
हाथ तेरा हाथ में रहे।

नहीं दुनिया से फिर डरना
न ग़म दिन, रात में रहे।

मेरी मंजिल है तेरा साथ।
यूं ही करती रहे तू बात।

ना मुझसे दूर तू जाए
ना छूटे हाथों से तेरा हाथ।

राघव सचिन की और रचनाएँ

सभी रचनाएँ — बोलती कलम