आओ लगाए पेड़
कविता — राघव सचिन
हमें बनाया है जिस धरा ने
आओ लगाए हम पेड़ उस पर।
उसी के ही कारण हम सभी हैं
ये ना रहेगी , रहेंगे किस पर।
हर एक मानव तरु लगाओ
तमाम मुश्किलों को भगाओ।
लगाएगा मानव पेड़ अब से
उसे ख़ुदा की कसम खिलाओ।
जो ना रहेंगे तरु यहाँ पर
कोई न रह पाएगा धरा पर ।
करो समर्पण कुछ अपना तुम धन
लगाएंगे पेड़, रखो जुबां पर ।
हरा भरा फिर रहेगा आलम
रहेंगी खुशियां, होंगे नहीं ग़म ।
धरा हंसेगी , सभी हँसेंगे
ये खुशियां,.... होंगी नहीं कम।
आओ लगाए हम पेड़ उस पर।
उसी के ही कारण हम सभी हैं
ये ना रहेगी , रहेंगे किस पर।
हर एक मानव तरु लगाओ
तमाम मुश्किलों को भगाओ।
लगाएगा मानव पेड़ अब से
उसे ख़ुदा की कसम खिलाओ।
जो ना रहेंगे तरु यहाँ पर
कोई न रह पाएगा धरा पर ।
करो समर्पण कुछ अपना तुम धन
लगाएंगे पेड़, रखो जुबां पर ।
हरा भरा फिर रहेगा आलम
रहेंगी खुशियां, होंगे नहीं ग़म ।
धरा हंसेगी , सभी हँसेंगे
ये खुशियां,.... होंगी नहीं कम।