शीर्षक रहित
मुक्तक — आशा अग्रवाल
उर में उरोज है,
सर में सरोज है ,
मन में मनोज है ,
मुखड़े पै ओज है,
बातों में फंसाती है,
सबको हंसाती है,
हिये(हृदय )में समाती वो ,
मेरे हर रोज है।
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चांद सी चमक है,
रवि सी दमक है ,
न मुझको फुरसत है,
ये मेरी फितरत है ,
कर नहीं पाता हूं,
कदर उस जान की मैं,
मैं उसकी किस्मत हूं,
वो मेरी किस्मत है।
******************
आशा अग्रवाल, भरतपुर
सर में सरोज है ,
मन में मनोज है ,
मुखड़े पै ओज है,
बातों में फंसाती है,
सबको हंसाती है,
हिये(हृदय )में समाती वो ,
मेरे हर रोज है।
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चांद सी चमक है,
रवि सी दमक है ,
न मुझको फुरसत है,
ये मेरी फितरत है ,
कर नहीं पाता हूं,
कदर उस जान की मैं,
मैं उसकी किस्मत हूं,
वो मेरी किस्मत है।
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आशा अग्रवाल, भरतपुर