नारी (मेरी पत्नी)

शायरी — आशा अग्रवाल

नारी बड़ी प्यारी है, बड़ी सीधी-सादी है।
मंद- मंद मुस्काती है, थोड़ी शर्माती है।
मन को लुभाती है, धीरे से बुलाती है।
नज़रें मिलाकर के नज़रें चुराती है।
मेरी नज़रों में वो ऐसे बस जाती है।
नजर न आये तो मुझे तड़पाती है।
प्यारी उसकी सारी है,सारी में वो न्यारी है।
उसपे खुमारी है , वो मेरी ज़िम्मेदारी है।

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