रंग ख़ुशी के
कविता — राघव सचिन
कुछ दिनों की ज़िंदगी हैं,
काम अच्छे करते जाओ।
दूसरों की ज़िंदगी में , रंग
ख़ुशी के भरते जाओ ।
ना बुरा करना किसी का ,
सोच भी न रखना तुम
ग़म, खुशी हर मोड़ पर है,
इनसे तुम गुज़रते जाओं
हम न कुछ लेकर आए थे,
न कुछ लेकर जाएंगे।
ख़ुश रहेंगे उतना, जितना
लोगों को हसाएंगे ।
सोच अपनी रखो बुलंद
तुम, सबसे प्यार से बोलो
मानवता से ही हम सारे ,
नाम बहुत कमाएंगे।
अपनों से छोटों का भी ,
सम्मान हमको करना हैं।
ज़िंदगी में उनकी हमको ,
हर उजाला भरना है।
हम है बच्चे रब के ही, याद
है क्या हम सबकों
मुश्किलें चाहे लाखों आए,
हमको नहीं डरना हैं।
हमको सबको मानवता की ,
सीख हमेशा देनी हैं।
हम हमेशा नहीं रहेंगे ,
मानवता पर रहनी है।
मानवता का पाठ पढाओं,
सब मानव को जा जाकर
हमको अब ना जाति पाति
ऊंच, नीच सहनी हैं।
काम अच्छे करते जाओ।
दूसरों की ज़िंदगी में , रंग
ख़ुशी के भरते जाओ ।
ना बुरा करना किसी का ,
सोच भी न रखना तुम
ग़म, खुशी हर मोड़ पर है,
इनसे तुम गुज़रते जाओं
हम न कुछ लेकर आए थे,
न कुछ लेकर जाएंगे।
ख़ुश रहेंगे उतना, जितना
लोगों को हसाएंगे ।
सोच अपनी रखो बुलंद
तुम, सबसे प्यार से बोलो
मानवता से ही हम सारे ,
नाम बहुत कमाएंगे।
अपनों से छोटों का भी ,
सम्मान हमको करना हैं।
ज़िंदगी में उनकी हमको ,
हर उजाला भरना है।
हम है बच्चे रब के ही, याद
है क्या हम सबकों
मुश्किलें चाहे लाखों आए,
हमको नहीं डरना हैं।
हमको सबको मानवता की ,
सीख हमेशा देनी हैं।
हम हमेशा नहीं रहेंगे ,
मानवता पर रहनी है।
मानवता का पाठ पढाओं,
सब मानव को जा जाकर
हमको अब ना जाति पाति
ऊंच, नीच सहनी हैं।