भारत
कविता — राघव सचिन
कितनी बार भारत चुप चाप बैठा रहा।
ज़ुल्म पाकिस्तान के , सहता रहा।
जब हदे पार कर दी पाकिस्तान ने..
तब भारत के धैर्य का , सारा दरिया बहा।
जिसमें शक्ति ज़्यादा हो,वो शांति अपनाता हैं।
कम शक्ति वाले दुष्टों की, उछलना ही भाता है।
जो मानवता ना रखें,वो इंसान नहीं कहलाते
मार गिराना उन दुष्टों को, भारत ये सिखलाया हैं।
माताओं, बहनों, बेटियों का , सुहाग जिसने उजाड़ा है।
भारत ने उन सैन्य दलों के झोपड़ों को फाड़ा है।
अब ये गलती पाकिस्तान, फिर से ना दोहराएगा।
भारत ने इस बार जगत में, वीरता को गढ़ा है।
भारत ने हर बार किसी की, मदद ही करनी चाही।
भारत हमेशा बनता रहा है , दूजो का हमराही।
पर ये जाहिल पाकिस्तान, इतना भी न समझ सका,
एक शहीद के बदले भारत , करेगा दस की भरपाई।
ज़ुल्म पाकिस्तान के , सहता रहा।
जब हदे पार कर दी पाकिस्तान ने..
तब भारत के धैर्य का , सारा दरिया बहा।
जिसमें शक्ति ज़्यादा हो,वो शांति अपनाता हैं।
कम शक्ति वाले दुष्टों की, उछलना ही भाता है।
जो मानवता ना रखें,वो इंसान नहीं कहलाते
मार गिराना उन दुष्टों को, भारत ये सिखलाया हैं।
माताओं, बहनों, बेटियों का , सुहाग जिसने उजाड़ा है।
भारत ने उन सैन्य दलों के झोपड़ों को फाड़ा है।
अब ये गलती पाकिस्तान, फिर से ना दोहराएगा।
भारत ने इस बार जगत में, वीरता को गढ़ा है।
भारत ने हर बार किसी की, मदद ही करनी चाही।
भारत हमेशा बनता रहा है , दूजो का हमराही।
पर ये जाहिल पाकिस्तान, इतना भी न समझ सका,
एक शहीद के बदले भारत , करेगा दस की भरपाई।