"बोलती कलम"

कविता — रोहिनी

विषय: "बोलती कलम"
" कविता "

निष्पक्ष निर्णय लेते रहे,
सबको एकता की डोर में बांधते रहे।
बोलती कलम से है यही आशा,
कवियों की आवाज को दें नया आसमान।
न कोई कवि और कवयित्री उदास रहे,
बोलती कलम के पथ पर,
चलें सभी मिलकर।
कवियों की दुनियां में ज्ञान की वर्षा होती रहे,
सबको अपने साथ लेकर आगे बढ़ते रहे,
बोलती कलम परिवार के सभी जन खुश रहे।
हम हैं एक परिवार सभी मिलकर कहें,
आपसी सहयोग की ज्योत जलाते रहे।

रोहिनी (स्वरचित)
देहरादून, उत्तराखंड

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