बोलती कलम"
कविता — Rohini Kamboj
"बोलती कलम"
"कविता"
बोलती कलम ने जब से थामा हाथ,
मिला कवियों की दुनियां को एक नया साज़।
सपने जो देखे थे आंखों ने कल तक, थे राज़,
बोलती कलम के साथ से पूरे होने लगे आज।
कवियों की दुनिया में हुआ नया आगाज़,
बोलती कलम का पथ जैसे कवियों का मेला लगा आज।
रोहिनी (स्वरचित)
"कविता"
बोलती कलम ने जब से थामा हाथ,
मिला कवियों की दुनियां को एक नया साज़।
सपने जो देखे थे आंखों ने कल तक, थे राज़,
बोलती कलम के साथ से पूरे होने लगे आज।
कवियों की दुनिया में हुआ नया आगाज़,
बोलती कलम का पथ जैसे कवियों का मेला लगा आज।
रोहिनी (स्वरचित)