दिखावे की दुनिया
कविता — सोहन सानप
एक सा दिखावा, बड़े से रंग
वायु से भी जल्दी बदलते लोग
नए से रंग, नए से ढंग
जिनके पीछे दौड़ते
कब वो जाने बदलते
जिनके लिए सजी रहती बज़्म
वायु से भी जल्दी बदलते लोग
दिखावे की दुनिया हर पल बदलती
चेहरे का ढंग बदलता
नए से किस्से, नई सी बात
जहाँ मिलता न जवाब
वायु से भी जल्दी बदलते लोग
दिखावे पे जी रहे लोग
कागा से भी काला
दिखावा जो ठहरा
बदलता रंग झपट रहा
जाले जो बिछा रहा
दिखावे की दुनिया के बड़े-बड़े लोग
दिखावे में मिट जाते लोग
वायु से भी जल्दी बदलते लोग
नए से रंग, नए से ढंग
जिनके पीछे दौड़ते
कब वो जाने बदलते
जिनके लिए सजी रहती बज़्म
वायु से भी जल्दी बदलते लोग
दिखावे की दुनिया हर पल बदलती
चेहरे का ढंग बदलता
नए से किस्से, नई सी बात
जहाँ मिलता न जवाब
वायु से भी जल्दी बदलते लोग
दिखावे पे जी रहे लोग
कागा से भी काला
दिखावा जो ठहरा
बदलता रंग झपट रहा
जाले जो बिछा रहा
दिखावे की दुनिया के बड़े-बड़े लोग
दिखावे में मिट जाते लोग