मुक्तक
मुक्तक — BEERAM SINGH
कुछ रोज़ से कलम मेरी उदास पड़ी है l
लगता है कोई याद दिल के पास खड़ी है l
लिखने के लिए बैठे थे कई दर्द समेटकर,
काग़ज़ पे मगर आज भी तन्हाई जड़ी है l
लगता है कोई याद दिल के पास खड़ी है l
लिखने के लिए बैठे थे कई दर्द समेटकर,
काग़ज़ पे मगर आज भी तन्हाई जड़ी है l