मुक्तक

मुक्तक — BEERAM SINGH

रात तन्हा बिताना ,बहुत है कठिन l
रोज तुमको मनाना ,बहुत है कठिन l
आँसुओं से लबालब , भरी आँखें है ,
एक पल में सुखाना ,बहुत है कठिन l

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