पिता
कविता — सोहन सानप
पिता ऐसा व्यक्तित्व
जिस नाम से हर जन जुडा
जिस ने चलाया
हिम्मत और वीरता दी
हर वक्त की खुशिया
हमे दि
जो उपर से सख्त
और अंदर से कोमल
जिस की वजह से
नाम हे
जिसकी वजह से
थाली मे रोटी है
वह एक ही है पिता
जिसकी ममता दिखती नही वह पिता”
जिस नाम से हर जन जुडा
जिस ने चलाया
हिम्मत और वीरता दी
हर वक्त की खुशिया
हमे दि
जो उपर से सख्त
और अंदर से कोमल
जिस की वजह से
नाम हे
जिसकी वजह से
थाली मे रोटी है
वह एक ही है पिता
जिसकी ममता दिखती नही वह पिता”