जागो भारत युवा

कविता — सोहन सानप

जागो भारत जागो
इस पल तो जागो
स्वार्थ की भावना छोड़ो
जागो भारत जागो

है यह धरती वंदन की
पर क्या इन लोगों ने संभाला
जिसे कहा माँ उसी पे थूक डाला
जागो भारत जागो
इस पल तो जागो

यहाँ का इंसान झगड़ रहा
घमंड में खो रहा
इधर न्याय भी जल्दी न मिलता
फिर भी कहे सौभाग्य हमारा

जागो भारत ऊँची आस पर आगे बढ़ो
शिक्षित, प्रगत, उच्चता को छू लो
भारत अब तो जाग लो

एकत्व की भावना
एकत्व में रह रही
कोई चप्पल तुम पे घिस रही
ऐसा कैसा हो रहा
सोने की मिट्टी को ही व्यापार बना रहा
अब जागो भारत जागो

उच्चता को छू लो
ज़रा अपने विचार बदलो
विकासशील से विकसित हो जाओ
भारत माता अब तो जाग लो

यह भूमि पावन
आज का युवा कैसे जी रहा
अपनी सोच नीचे गिरा रहा
हाय राम, क्या हो रहा
भारत का बच्चा किस ओर चल रहा

जागो भारत जागो
हे युवा, स्वार्थ तो छोड़ो
देशप्रेम को लेकर आगे बढ़ो

भारत महान था
अभी कैसा हो रहा
अभी परिवर्तित करो
भारत को महान रहने दो

जाग भारत के युवा जागो
इस पल तो जागो

कई जवान आए
इस भूमि के लिए
प्राण भी बलिदान दिए
भारत माता के बच्चो
ऐ भारत माता का खून
अब तो जाग लो
जागो भारत जागो

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