जयतु भारतमाता

कविता — सोहन सानप

कमल कोमल विद्यावानी
जयतु जयतु भारतमाता
विमल सचल उज्वल
दुर्गारूपि नमामि त्वां
गंगा यमुना, राज्य देशा
नमनीय वंदनीय भूमित्वा
जयकारती भारतमाता
शूरवीर बलिदान दिए
असंख्य रक्त भूमि मे जडे
आठप्रहर तुम्हारी सरणा
जयतु जयतु भारतमाता
असंख्य भाषा, ज्ञान
असंख्य शूरवीर पावन
कोख मे तेरे भूमित्वा
जयतु जयतु भारतमाता
शस्त्रसशस्त्र धारीणी
वेदज्ञान परिहकीर्ती
जयतु माँ भारती
विद्वान विद्यावान
तुम्हारे संतान
जयतु जयतु भारतमाता
नमामि त्वां

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