अनकहे जज़्बात
मुक्तक — पूर्णिमा सुमन
मौन अधरो पर रखें कुछ अनकहे जज्बात है।
नैन कहनें को है आतुर पर हया की घात है।
आज मै पहली दफा हूँ रूबरू तुमसे मगर,
यूं लगे दिल को मिली शुकुने- दिल सौगात है।
नैन कहनें को है आतुर पर हया की घात है।
आज मै पहली दफा हूँ रूबरू तुमसे मगर,
यूं लगे दिल को मिली शुकुने- दिल सौगात है।