नारायण कवच।

कविता — संदीप शर्मा ‘सरल’

भगवान श्री हरि का "नारायण कवच"!!

भगवान श्री हरि गरूड की पीठ पर अनेक चरण कमल रखे हुए है!अणिमादि आठों सिद्धियाँ उनकी सेवा कर रही है!आठ हाथों मे शंख चक्र ढाल तलवार गदा बाण धनुष और पाश ( फंदा)सुशोभित है!वे ही ॐकार स्वरूप प्रभु सब प्रकार से सब और से मेरी रक्षा करे!(12)

मत्स्य मूर्ति भगवान जल के भीतर जल जंतुओं से और वरूण के पाश से मेरी रक्षा करे!
माया से ब्रह्मचारी का रूप धारण करने वाले वामन भगवान स्थल पर और विश्व रूप श्री त्रिविक्रम भगवान आकाश मे मेरी रक्षा करे!(13)

जिनके घोर अट्टहास से सब दिशाएं गूंज उठी थी और गर्भवती दैत्यों की पत्नियों के गर्भ गिर गए थे वे दैत्य यूथपतियों के शत्रु भगवान नृसिंह किले जंगल रणभूमि आदि विकट स्थानो मे मेरी रक्षा करे!(14)

अपनी दाढ़ों पर पृथ्वी को धारण करने वाले यज्ञ मूर्ति वाराह भगवान मार्ग मे परशुराम जी पर्वतों के शिखरों पर और लक्ष्मण जी सहित भरत के बड़े भाई भगवान रामचंद्र प्रवास के समय मेरी रक्षा करे!(15)

भगवान नारायण मारण मोहना आदि भयंकर अभिचारों और सब प्रकार के प्रमादों से मेरी रक्षा करे!
ऋषि श्रेष्ठ नर गर्व से योगेश्वर भगवान दत्तात्रेय योग के विघ्नों से और त्रिगुणाधिपति भगवान कपिल कर्म बंधनो से मेरी रक्षा करे!(16)

परम ऋषि सनत्कुमार कामदेव से हयग्रीव भगवान मार्ग मे चलते समय देव मूर्तियों को नमस्कारादि न करने के अपराध से देव ऋषि नारद सेवा अपराधो से और भगवान कच्छप सब प्रकार के नरकों से मेरी रक्षा करे!

भगवान धन्वंतरि कुपथ्य से जितेन्द्रिय भगवान ऋषभदेव जी सुख दुख आदि भयदायक द्वंद्वों से यज्ञ भगवान लोकापवाद से बलराम जी मनुष्य कृत कष्टों से और श्री शेष जी क्रोध वश नामक सर्पों के गणो से मेरी रक्षा करे!(17)

भगवान श्री कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास जी अज्ञान से तथा बुद्ध देव पाखंडियों से और प्रमाद से मेरी रक्षा करे!(18)

धर्म रक्षा के लिए महान अवतार धारण करने वाले भगवान कल्कि पाप बाहुल्य कलिकाल के दोषों से मेरी रक्षा करे!(19)

प्रातः काल भगवान केशव अपनी गदा लेकर दिन चढ़ आने पर भगवान गोविंद अपनी बांसुरी लेकर दोपहर के पहले भगवान नारायण अपनी तीक्ष्ण शक्ति लेकर और दोपहर को भगवान विष्णु चक्र राज सुदर्शन लेकर मेरी रक्षा करे!(20)

तीसरे पहर मे भगवान मधुसूदन अपना प्रचंड धनुष लेकर मेरी रक्षा करे!सांयकाल मे ब्रह्मादि त्रिमूर्ति माधव सूर्यास्त के बाद हृर्षिकेश पर अर्ध रात्रि के पूर्व तथा अर्ध रात्रि के समय अकेले भगवान पद्मनाभ मेरी रक्षा करे!(21)

रात्रि के पिछले प्रहर मे श्री वत्सलाक्ष्न श्रीहरि उषा काल मे खडगधारी भगवान जनार्दन सूर्योदय से पूर्व श्री दामोदर और संपूर्ण संध्याओं मे काल मूर्ति भगवान विश्वेश्वर मेरी रक्षा करे!(22)

सुदर्शन आपका आकार चक्र (रथ के पहिए की तरह है) आपके किनारे के भाग प्रलय कालीन अग्नि के सामान अत्यंत तीव्र है आप भगवान की प्रेरणा से सब और घूमते रहते है जैसे आग वायु की सहायता से सूखे घास-फूस को जला डालती है वैसे ही आप हमारे शत्रुओं की सेनाओं को शीघ्र से शीघ्र जला दीजिए! जला दीजिए! जला दीजिए!(23)

कौमोदकी गदा आपसे छूटने वाली चिनगारियों का स्पर्श वज्र के सामान असहाय है !आप भगवान अजित की प्रिया है और मैं उनका सेवक हूँ! इसलिए आप कूष्मांड विनायक यक्ष राक्षस भूत और प्रेत आदि ग्रहो को अभी कुचल डालिए! कुचल डालिए! कुचल डालिए! तथा मेरे शत्रुओं को चूर चूर कर दीजिए! (24)

शंख श्रेष्ठ आप भगवान श्रीकृष्ण के फूंकने से भयंकर शब्द करके मेरे शत्रुओं का दिल दहला दीजिए! एवं यातुधान प्रमथ प्रेत मातृका पिशाच तथा ब्रह्म राक्षस आदि भयावने प्राणियों को यहां से झटपट भगा दीजिए !(25)

भगवान की प्यारी तलवार आप की धार बहुत तीक्ष्ण है आप भगवान की प्रेरणा से मेरे शत्रुओं को छिन्न भिन्न कर दीजिए! (26)

भगवान की प्यारी ढाल आप मे सैकड़ो चंद्राकार मंडल है आप पाप दृष्टि पापात्मा शत्रुओं की ऑखे बंद कर दीजिए! उन्हे सदा के लिए अंधा बना दीजिए! (27)

सूर्य आदि ग्रह धूमकेतू ( पुच्छल तारे)आदि केतु दुष्ट मनुष्य सर्पादि रेंगने वाले जंतु दाढ़ो वाले हिंसक पशु भूत प्रेत आदि तथा पापी प्राणियों से हमे जो जो भय हो और जो जो हमारे मंगल विरोधी हो वे सभी भगवान के नाम स्वरूप तथा आयुधों का कीर्तन करने से नष्ट हो जाए (28)

वृहद रथन्तर आदि सामवेदीय स्त्रोतों से जिनकी स्तुति की जाती है वे वेदमूर्ति भगवान गरूड और विश्वकसेन जी अपने नामोच्चारण के प्रभाव से हमे सब प्रकार की विपत्तियों से बचायें!(29)

श्रीहरि के नाम रूप वाहन आयुध और श्रेष्ठ पार्षद हमारी बुद्धि इन्द्रियों मन और प्राणों के सब प्रकार की आपत्तियों से बचाए! (30)

जितना भी कार्य अथवा कारण रूप जगत है वह वास्तव मे भगवान ही है इस सत्य के प्रभाव से हमारे सारे उपद्रव नष्ट हो जाए! (31)

जो लोग ब्रह्म और आत्मा की एकरूपता उनकी दृष्टि मे भगवान स्वरूप समस्त विकल्पों भेदों से रहित है फिर भी वह अपनी माया शक्ति के द्वारा भूषण आयुध और रूप नामक शक्तियों को धारण करते है!यह बात निश्चित रूप से सत्य है!
इस कारण सर्वज्ञ सब स्वरूपों से हमारी रक्षा करे!(32-33)
जो अपने भंयकर अट्टहास से सब लोगो के भय भगा देते है और अपने तेज से सबका तेज ग्रस लेते है !वे भगवान नृसिंह दिशा विदिशा मे नीचे उपर बाहर भीतर सब और से हमारी रक्षा करे। (34)
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संदीप शर्मा सरल।
देहरादून उत्तराखंड ।
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