Chand
कविता — पुष्पा पाठक
*छंद सुखी सवैया
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हरि नाम लिया इठलाय चला, प्रभु के दर्शन किए भावुक होकर
प्रभु ने अविलंब लगाए गले, जल हाथ न छूकर आंसुन धोकर।।
फिर पूछ के आगे कुशल मंगल बिठलाए दिया निज आसान ऊपर।।
रनिवास से रानियां आकर देखें,
भक्ति के भाव से शीश झुका कर।।
स्वरचित पुष्पा पाठक छतरपुर मध्य प्रदेश
आठ सगण 2 लघु
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हरि नाम लिया इठलाय चला, प्रभु के दर्शन किए भावुक होकर
प्रभु ने अविलंब लगाए गले, जल हाथ न छूकर आंसुन धोकर।।
फिर पूछ के आगे कुशल मंगल बिठलाए दिया निज आसान ऊपर।।
रनिवास से रानियां आकर देखें,
भक्ति के भाव से शीश झुका कर।।
स्वरचित पुष्पा पाठक छतरपुर मध्य प्रदेश
आठ सगण 2 लघु